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पीएम और सीएम खड़े रहे ‘डीएम’ बैठे रहे….!

मंगलवार को वाराणसी से नामांकन पत्र दाखिल किया। इस दौरान पीएम मोदी खड़े थे, जबकि रिटर्निंग आॅफिसर (कलेक्टर) बैठे हुए थे। ऐसे में हर व्यक्ति के दिमाग में एक सवाल था कि क्या रिटर्निंग अधिकारी पीएम से बड़ा होता है। यदि नहीं तो फिर पीएम के सामने खड़ा क्यों नहीं हुआ।
पीएम मोदी जब नामांकन दाखिल करने पहुंचे, तब उनके साथ गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सीएम योगी आदित्यनाथ समेत तमाम बड़े नेता भी मौजूद रहे। तस्वीर पर गौर किया कि नामांकन पत्र दाखिल करते वक्त पीएम मोदी तो खड़े थे, लेकिन रिटर्निंग आॅफिसर कुर्सी पर ही बैठे रहे। हालांकि, सिर्फ पीएम मोदी ही नहीं, बल्कि कोई भी उम्मीदवार हो, रिटर्निंग आॅफिसर बैठे ही रहते हैं। दरअसल, ये एक प्रोटोकॉल होता है। नामांकन करने कितना ही बड़ा नेता क्यों न आ जाए, उनके सम्मान में रिटर्निंग आॅफिसर खड़ा नहीं हो सकता।
खड़े क्यों नहीं होते रिटर्निंग आॅफिसर?- चुनाव के दौरान रिटर्निंग आॅफिसर उस जिले का मुख्य चुनाव अधिकारी होता है। और कोई भी व्यक्ति एक उम्मीदवार की हैसियत से नामांकन करने आया होता है, फिर चाहे वो प्रधानमंत्री ही क्यों न हों, इसलिए रिटर्निंग आॅफिसर बैठे रहते हैं। रिटर्निंग आॅफिसर एकमात्र लीगल अथॉरिटी होता है और उनपर कोई भी आदेश नहीं चला सकता। प्रोटोकॉल के कारण नामांकन प्रक्रिया के दौरान रिटर्निंग आॅफिसर अपनी कुर्सी पर बैठे रहते हैं। ये ठीक उसी तरह होता है जैसा अदालतों में होता है। अदालत में बड़े नेता या मंत्री की पेशी क्यों न हो, जज अपनी कुर्सी से खड़े नहीं होते। वैसे ही रिटर्निंग आॅफिसर भी नामांकन के समय कभी खड़े नहीं होते।

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बेटी समेत तीन महीने के घायल मासूम को छोड़ कर चले गए माता-पिता

ग्वालियर का कमलाराजा अस्पताल। यहां बाल गहन चिकित्सा इकाई (पीआईसीयू) में भर्ती है तीन महीने का मासूम। शरीर पर जलने के मल्टीपल घाव हैं। चोट के भी निशान हैं। रात से झटके आ रहे हैं। कभी बेहोश हो जाता है, तो कभी रोने लगता है। रह-रहकर दर्द से कराहता है। उसकी हालत देख नर्सों के भी आंसू निकल आते हैं। यहां आॅक्सीजन सपोर्ट पर है। 24 घंटे के आॅब्जर्वेशन में रखा गया है। घाव देखकर कहते हैं कि इस मासूम ने कितनी प्रताड़ना झेली होगी, इसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता।
ग्वालियर रेलवे स्टेशन बुकिंग काउंटर के पास शनिवार रात आरपीएफ (रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स) को तीन बच्चे लावारिस मिले थे। इनमें एक की उम्र 6 साल, दूसरे की 7 साल और मासूम की उम्र करीब 3 महीने है। दोनों बच्चों को महिला बालिका विकास गृह में भेजा गया है।

महिला बाल विकास ने बालिका गृह में रह रही दोनों बच्चियों की काउंसिलिंग की गई। बच्चियां अभी भी सहमी हुई हैं। 7 साल की बच्ची को कुछ-कुछ याद है। उसने बताया कि वे गुजरात के रहने वाले हैं। पिता मजदूरी करते थे, जबकि मां लोगों के घरों में झाड़ू-पोछा लगाती है। वह गुजरात से ट्रेन में बैठकर धौलपुर आ गए। कुछ दिन से धौलपुर रेलवे स्टेशन के पास रह रहे थे। फिर वह ट्रेन से ग्वालियर पहुंचे। माता-पिता शुक्रवार (10 मई) रात को उन्हें रेलवे स्टेशन पर छोड़कर चले गए। अगले दिन सुबह माता-पिता आए और खाना खिलाया। साथ ही, मां ने कहा था कि बाबू का ख्याल रखना। हम कुछ देर में आते हैं। इसके बाद दोनों नहीं लौटे।
शरीर पर निशान कीड़े काटने के नहीं, वो जल गया था : बच्ची ने काउंसिलिंग में बताया कि उनके भाई (बाबू) के जो घाव हैं, वह कीड़े काटने से नहीं, बल्कि जलने के हैं। हालांकि, बच्ची यह नहीं बता पाई कि भाई बार-बार कैसे जला। उसके शरीर पर अन्य घाव कैसे आए। माता-पिता उन्हें क्यों छोड़ गए? बच्चियों ने यह तो बताया कि वह गुजरात के रहने वाले हैं, पर कहां के, यह नहीं बता पा रहीं।
नहीं दिखे बच्चों के माता-पिता : पुलिस का कहना है कि घटना के एक दिन पहले से लेकर एक दिन बाद और उसके बाद के भी सीसीटीवी फुटेज देख लिए हैं, लेकिन सुराग नहीं मिला है। आरपीएफ थाना प्रभारी संजय आर्य ने बताया कि बच्चियों ने जैसा बताया कि धौलपुर स्टेशन के आसपास काफी दिन तक रुके थे। बच्चियां धौलपुर का कह रही हैं, लेकिन वो धौलपुर व मनिया के बीच में किसी छोटे स्टेशन पर रहे होंगे। आरपीएफ की एक टीम वहां भी सर्चिंग कर रही है।

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बेटी समेत तीन महीने के घायल मासूम को छोड़ कर चले गए माता-पिता

ग्वालियर का कमलाराजा अस्पताल। यहां बाल गहन चिकित्सा इकाई (पीआईसीयू) में भर्ती है तीन महीने का मासूम। शरीर पर जलने के मल्टीपल घाव हैं। चोट के भी निशान हैं। रात से झटके आ रहे हैं। कभी बेहोश हो जाता है, तो कभी रोने लगता है। रह-रहकर दर्द से कराहता है। उसकी हालत देख नर्सों के भी आंसू निकल आते हैं। यहां आॅक्सीजन सपोर्ट पर है। 24 घंटे के आॅब्जर्वेशन में रखा गया है। घाव देखकर कहते हैं कि इस मासूम ने कितनी प्रताड़ना झेली होगी, इसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता।
ग्वालियर रेलवे स्टेशन बुकिंग काउंटर के पास शनिवार रात आरपीएफ (रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स) को तीन बच्चे लावारिस मिले थे। इनमें एक की उम्र 6 साल, दूसरे की 7 साल और मासूम की उम्र करीब 3 महीने है। दोनों बच्चों को महिला बालिका विकास गृह में भेजा गया है।

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गाजा में शहीद रिटायर्ड कर्नल काले महू के आर्मी कॉलेज में रह चुके हैं कोच

इजरायल-हमास युद्ध के बीच गाजा के राफा शहर में हमले की चपेट में आने से संयुक्त राष्ट्र के लिए काम करने वाले रिटायर्ड भारतीय कर्नल वैभव अनिल काले की मौत हो गई। भारतीय सेना से रिटायर्ड काले रफाह के यूरोपियन हास्पिटल में संयुक्त राष्ट्र की ओर से सुरक्षा कार्यों के लिए तैनात थे। वे संयुक्त राष्ट्र के ही वाहन में सवार थे। उनका इंदौर से भी नाता रहा है। आईआईएम इंदौर में पढ़ाइ की। महू इन्फेंट्री कॉलेज में कोच रहे।
काले के सोशल मीडिया मंच लिंक्डइन पर दी गई जानकारी के मुताबिक वह अप्रैल 2004 में भारतीय सेना में शामिल हुए थे। उन्होंने 2009 से 2010 तक संयुक्त राष्ट्र में मुख्य सुरक्षा अधिकारी के तौर पर सेवाएं दीं। काले के नागपुर के रहने वाले थे। उन्होंने स्कूली पढ़ाई सोमलवार उच्च माध्यमिक स्कूल से की। उन्होंने दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी से बिहेवियरल साइंस और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून में ग्रैजुएशन किया था। आईआईएम इदौर और लखनऊ से भी पढे।
काले अकादमी में 97वें कोर्स के नवंबर स्क्वाड्रन से थे। 1999 में एनडीए से पासआउट हुए थे। आईएमए से पासआउट होने के बाद उन्हें 2000 में भारतीय सेना में शामिल किया गया था।काले महू में सेना के इन्फैंट्री स्कूल में कोच भी रह चुके हैं।

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माधवी राजे सिंधिया का निधन

ज्योतिरादित्य सिंधिया की मां माधवी राजे का निधन हो गया है। बुधवार सुबह 9 बजकर 28 मिनट पर माधवी राजे सिंधिया ने अंतिम सांस ली। वे पिछले कई महीनों से बीमार चल रही थीं, कुछ दिन पहले जब उनकी हालत ज्यादा खराब हुई तो उन्हें दिल्ली के एम्स में भर्ती करवाया गया। वहां भी वे वेंटिलेटर पर रखी गई थीं, लेकिन बुधवार सुबह को डॉक्टर उन्हें नहीं बचा सके और उनका निधन हो गया।
बताया जा रहा है कि माधवी राजे को निमोनिया के साथ-साथ सेप्सिस बीमारी थी। उनका इलाज लंबे समय से चल रहा था, लेकिन उनकी सेहत में ज्यादा सुधार होता दिखा नहीं और अब 70 साल की उम्र में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। पिछले काफी समय से सिंधिया की मां पब्लिक लाइफ से दूर चल रही थीं, उनकी सक्रियता काफी कम हो चुकी थी। ज्योतिरादित्य सिंधिया की मां माधवी राजे का निधन हो गया है। बुधवार सुबह 9 बजकर 28 मिनट पर माधवी राजे सिंधिया ने अंतिम सांस ली।
वे पिछले कई महीनों से बीमार चल रही थीं, कुछ दिन पहले जब उनकी हालत ज्यादा खराब हुई तो उन्हें दिल्ली के एम्स में भर्ती करवाया गया। वहां भी वे वेंटिलेटर पर रखी गई थीं, लेकिन बुधवार सुबह को डॉक्टर उन्हें नहीं बचा सके और उनका निधन हो गया। वैसे माधवी राजे को लेकर कहा जाता है कि उनका संबंध नेपाल राजघराने से रहा है। शादी से पहले उनका नाम प्रिंसेस किरण राज्यलक्ष्मी था।उनके दादा शमशेर जंग बहादुर राणा तो नेपाल के प्रधानमंत्री भी रह चुके थे। लेकिन फिर 1966 में उनकी शादी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता माधवराव सिंधिया से हो गई और तब मराठी परंपरा के तहत उनका नाम माधवी राजे रख दिया गया।

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