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इंदौर

कई इलाकों में 2 से 7 घंटे बिजली कटौती; लिटरेचर फेस्टिवल 12 से

यहां हम आपको बता रहे हैं कि शहर में आज कहां-क्या हो रहा है। हर वह जानकारी होगी, जो आपके काम आएगी।
आज भी कैंसिल रहेगी भोपाल-जयपुर एक्सप्रेस
भोपाल मंडल में रामगंजमंडी-भोपाल के मध्य नयी ब्रोडगेज रेल लाइन कार्य किया जा रहा है। इस कार्य के चलते भोपाल-जयपुर एक्सप्रेस को निरस्त व आंशिक निरस्त करने का निर्णय रेलवे ने लिया है। गाड़ी संख्या 19711 जयपुर-भोपाल एक्सप्रेस 28 दिसंबर को भी अपने प्रारंभिक स्टेशन से निरस्त रहेगी।
इन इलाकों में रहेगी बिजली गुल
सुबह 10 से दोपहर 2 बजे तक जेके टाउन, राजीव गांधी कॉलेज, प्रियदर्शिनी, आम्र ईडन गार्डन, शिवालय, गिरधर परिसर, आम्र वैली, विधान एलिना, मंगेश हाइट, विनीत कुंज इ सेक्टर, पार्क सेरेना कॉलोनी, कस्टम कॉलोनी एवं आसपास के इलाके। सुबह 10 से शाम 5 बजे तक पूर्वांचन, ऋषिपुरम्, इंडस, सुरभि विहार एवं आसपास के इलाके।
सुबह 11 से दोपहर 1 बजे तक इंडस टाउन, हरिगंगा, कृष्णापुरम, राधापुरम, सेवा सदन, शुभालय परिसर, नटराज, अनुजा विलेज एवं आसपास के क्षेत्र।
सुबह 11 से दोपहर 3 बजे तक दीक्षा नगर, रामेश्वरम, गुलाबी नगर, अमृत होम्स, देवकी नगर, करोंद, बैरसिया रोड, पंचवटी कॉलोनी, गैस राहत कॉलोनी, विवेकानंद कॉलोनी, राजीव नगर, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी एवं आसपास के क्षेत्र।
इन रास्तों से गुजरे
होशंगाबाद रोड स्थित रुचि लाइफ स्केप से शनि मंदिर तिराहे तक का रास्ता 1 महीने के लिए बंद रखा गया है। यहां नगर निगम सीमेंट क्रॉन्कीट की सड़क बना रहा है। राहगीर रुचि लाइफ स्केप से निरुपम रॉयल पाम एवं पेबल वे और राफेल स्कूल के पास से हनुमान मंदिर के पीछे से होते हुए होशंगाबाद रोड पर आना-जाना कर सकते हैं।
बीएलएफ के पोएट्री कॉम्पीटिशन के लिए करें अप्लाई
भोपाल लिटरेचर फेस्टिवल 12, 13 और 14 जनवरी को भोपाल में होगा। युवा एवं नवोदित रचनाकारों को प्रोत्साहित एवं पुरस्कृत करने के उद्देश्य से एक पोएट्री कॉम्पिटिशन आयोजित होगा। विभिन्न आयु वर्ग के युवाओं के लिए हिंदी एवं अंग्रेजी भाषा में आयोजित की जा रही इस प्रतियोगिता में आप रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।

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1 जनवरी को खजराना गणेश में 25 मिनट में होंगे दर्शन

इंदौर में भी बड़ी संख्या में लोग नए साल के पहले दिन 1 जनवरी की शुरुआत देव दर्शन के साथ करते हैं। शहर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर में हर साल भक्तों की संख्या बढ़ती जा रही है। पिछले साल की तुलना में इस बार करीब डेढ़ लाख से ज्यादा भक्तों के आने की संभावना है।
मंदिर प्रशासन का मानना है कि इस बार 6 लाख से ज्यादा भक्त मंदिर पहुंचेंगे। मंदिर में दर्शन व्यवस्था को लेकर तैयारियों का दौर जारी है। इस बार मंदिर पहुंचने वाले वाहनों का एंट्री पाइंट क्या रहेगा, ये फिलहाल तय नहीं हुआ है। 30 दिसंबर को इस पर निर्णय होगा। मंदिर आने वाले भक्तों को पिछले साल खजराना चौराहे से कालिका माता होते हुए मंदिर के अंदर प्रवेश दिया था और दर्शन के बाद श्रद्धालु वाहनों सहित गणेश पुरी सर्विस रोड होते हुए खजराना चौराहे पर पहुंचे थे। इस बार भी मंदिर पहुंचने के लिए यही व्यवस्था रहेगी या नहीं…अभी इस पर निर्णय नहीं हो सका है। व्यवस्था में बदलाव की कोशिश पर विचार चल रहा है। पुलिस की तरफ से ये सुझाव दिया गया है कि गणेशपुरी से भक्तों को एंट्री और कालिका माता मंदिर की ओर से भक्तों को बाहर किया जाएगा।
मंदिर पहुंचने के बाद पार्किंग में भक्त वाहन खड़े कर अंदर आएंगे। प्रसाद-हार फूल लेने के बाद भक्तों को दर्शन के लिए लाइन में लगना होगा। परिसर में ही बैरिकेड्स लगाकर जिग-जैग लाइन बनाई गई है। यहां पहली बार स्थायी शेड लगाया है। यहां से आगे भक्त मंदिर परिसर में प्रवेश करेंगे। वहां भी अस्थायी शेड लगाए जाएंगे। भगवान गणेश के दर्शन के लिए 4 स्टेप में 4 लाइन रहेगी। मंदिर प्रबंध समिति की कोशिश है कि लाइन में लगे भक्तों को अधिकतम 20 से 25 मिनट में भगवान के दर्शन हो जाएं। खजराना गणेश मंदिर में सुबह 6 से रात 12 बजे तक दर्शन होंगे। कोरोना काल के बाद रात को 12 से सुबह 6 बजे तक भक्तों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। पहले 24 घंटे दर्शन चालू रहते थे। 1 जनवरी के मद्देनजर पूरे मंदिर को फूलों से सजाया जाएगा। जनवरी महीने के आखिर में तिल चतुर्थी मेला भी लगेगा, तब भगवान का विशेष शृंगार किया जाता है। महाकाल कॉरिडोर बनने के बाद से दर्शन के लिए मंदिर आने वाले भक्तों की भीड़ और भी बढ़ गई है।

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अफसर संवेदनशीलता के साथ करें लोगों की समस्याओं का निराकरण – कलेक्टर

कलेक्टर इलैयाराजा टी ने सभी अफसरों को निर्देश दिए हैं कि जनसुनवाई में आने वाले लोगों की समस्याओं का निराकरण संवेदनशीलता के साथ करें। उन्होंने कहा कि लोग जनसुनवाई में दूर-दूर से काफी उम्मीद से आते हैं। कलेक्टर ने यह निर्देश जनसुनवाई को लेकर दिए। इधर इस बार की जनसुनवाई में भी जरूरतमंद और पीड़ितों की भारी भीड़ उमड़ी।
इंदौर के कलेक्टर कार्यालय में हर मंगलवार को आयोजित होने वाली जनसुनवाई में लोग जिले के कोने-कोने से अपनी समस्याओं के समाधान के लिए आशा के साथ आते हैं। जनसमस्याओं का निराकरण कलेक्टर डॉ. इलैयाराजा टी व अन्य अफसरों द्वारा धैर्य और संवेदनशीलता के साथ सुनकर किया जाता है। इसी क्रम में इस मंगलवार को भी जनसुनवाई में बड़ी संख्या लोग पहुंचे।
जनसुनवाई में जिले की तीन अनाथ बेटियां स्वाति, गौरी और छमा परमार कलेक्टर डॉ. इलैयाराजा टी के समक्ष सहायता की उम्मीद से आईं। उन्होंने बताया कि वे अनाथ आश्रम में रहती हैं और कॉलेज में छोटी-सी जॉब करती हैं, साथ ही वे तीनों अपनी पढ़ाई भी पूरी कर रही हैं। रोजगार और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाने के लिए उन्हें आवागमन में दिक्कत आ रही है, जिसके लिए उन्हें स्कूटी की आवश्यकता है।
कलेक्टर ने उनकी समस्या को समझा और रेडक्रॉस के माध्यम से तीनों बालिकाओं को स्कूटी प्रदान करने के निर्देश दिए। जनसुनवाई में कलेक्टर ने तत्कालिक जरूरतों की पूर्ति के लिए ज्योति प्रजापत को 30 हजार रुपए, दया मेहरा को 10 हजार रुपए, वंदना इंगले को सिलाई मशीन हेतु 10 हजार रुपए, रवि यादव, वंदना कश्यप तथा अंजलि रावत को 5-5 हजार रुपए, ज्योति कौशल तथा अर्पिता को 3-3 हजार रुपए तथा अन्य को रेडक्रॉस से मदद स्वीकृत की।

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इंदौर की बेटी कृष्णा नई सरकार में बनी राज्यमंत्रीकाछी मोहल्ला में मायका, टअ की पढ़ाई के दौरान लड़ा था पहला छात्र संघ चुनाव

बेटे कैलाश विजयवर्गीय, तुलसी सिलावट के अलावा इंदौर की बेटी और भोपाल की गोविंदपुरा सीट से विधायक कृष्णा गौर भी डॉ. मोहन यादव सरकार में मंत्री बनी हैं। उनका मायका इंदौर के काछी मोहल्ला में है और यहीं उनका बचपन बीता। बड़े भाई-बहनों में झगड़ा हो जाता था, तो छोटी होने के बावजूद उन्हें समझाती थी। खाने में टिक्कड़-आलू मैथी की सब्जी और मक्खन बड़े पसंद हैं। शादी के बाद भोपाल गई तो वहां राजनीति को बहुत करीब से देखा। पति की मौत के 4 दिन बाद ही जनसेवा के लिए कमर कस ली थी। जानिए इंदौर की बेटी की कहानी भाई गोपाल सिंह यादव की जुबानी..।
गरबों का शौक था, कृष्ण बनती थी- कुश्ती में विक्रम अवार्डी भाई गोपाल सिंह यादव ने कृष्णा के बचपन और परिवार के बारे में चर्चा करते हुए कहा, हमारा कुल 10 भाई-बहनों का परिवार है। बड़े भाई स्व.मदन सिंह यादव, मैं और कृष्णा सहित 5 बहने हैं। मैं गोद गया था, तो वहां मेरी दो बहनें और हैं। कृष्णा बचपन से ही खुशमिजाज है। वो परिवार, भाई-बहनों के प्रति हमेशा एक्टिव रही। उसका शुरू से ही अलग ही नजरिया रहा है। सामाजिक कार्यक्रमों में भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेती थी। बड़ा परिवार है तो शादी समारोह में भी जाती और वहां भी खूब काम करती। पिताजी ने नवरात्रि गरबों की आधार शिला रखी थी। सबसे पहले गुजराती समाज के खातीपुरा में गरबे होते थे और दूसरे नंबर पर हमारे यहां काछी मोहल्ले में गरबे होते थे। इसके बाद ही पूरे इंदौर में गरबे शुरू हुए हैं। बहन कृष्णा को गरबों का बहुत शौक था। इस दौरान किसी भी प्रसंग के चित्रण में वो ऐसा अभिनय करती थी कि उस पात्र को जीवंत कर देती थी।
अहिल्याश्रम और कमला नेहरू से स्कूलिंग, ओल्ड जीडीसी से किया एमए- गोपाल सिंह के मुताबिक कृष्णा की शुरूआती स्कूलिंग राजकला निकेतन से हुई। पांचवीं तक अहिल्याश्रम में पढ़ीं। फिर छावनी स्थित कमला नेहरू स्कूल में कक्षा 6 से 11वीं तक की पढ़ाई की। इसके बाद ओल्ड जीडीसी कॉलेज से भूगोल में एमए किया। इसी दौरान 1984-85 में छात्र संघ का चुनाव भी लड़ीं। पढ़ाई भी लक्ष्य तय कर करती थी। पिताजी से खुद आगे होकर ट्यूशन लगवाने के लिए कहती थी। मन लगाकर पढ़ती थी। बचपन में हम भाई-बहनों में कुछ झगड़ा हो जाता था। मनमुटाव हो जाता तो बैठकर सबको समझाती थी कि हमें ऐसा नहीं करना है। अपना परिवार क्या है वो देखो, पिताजी किस स्तर के हैं वो देखो। उसका उद्देश्य परिवार को साथ लेकर चलना रहा है। मेरा तो आज तक उससे कोई वाद-विवाद, झगड़ा भी नहीं हुआ। उसका कभी किसी से मनमुटाव तक नहीं हुआ। बहन कृष्णा शुरू से जो ठान लेती थी वो करती थी। उसे कुछ समझाने की जरूरत नहीं पड़ती थी। किसी भी मामले में पिता उससे पूछते तो कहती थी मैंने सोच लिया दादा। पिताजी को वो दादा बोलती थी। वो काफी जिज्ञासु थी। अपने निर्णय खुद लेती थी। बहन कृष्णा को जब हमारे बहनोई (स्व.पुरुषोत्तम गौर) देखने आए तो उनका ये कहना था कि जिससे मैं शादी करू वो परफेक्ट हो, क्योंकि राजनीतिक परिवार है। पिताजी (पूर्व मुख्यमंत्री स्व.बाबूलाल गौर) राजनीति में थे। बहन से जब उनकी बातचीत हुई और जो-जो सवाल पूछे उनके बहन ने बहुत ही सटीक जवाब दिए तो वे खड़े हुए और बोले की मुझे लड़की (कृष्णा गौर) पसंद है। शादी की जब तैयारियां शुरू हुई तो उस समय माहौल ये था कि मैरिज गार्डन नहीं होते थे। जो भी शादी होती थी वो मोहल्ले या धर्मशाला में होती थी। बारात में सभी वरिष्ठ लोग आए थे। पिताजी ने तब बारात के ठहराने की व्यवस्था जेल रोड पर ब्राह्मण सभा की धर्मशाला में की थी। संघ से जुड़े लोग थे तो जमीन पर सोना। बैठकर भोजन करना ये सारी चीजें रहती थी। तो उस हिसाब से सारी व्यवस्था की गई। शुद्ध घी में भोजन बना था। तब सुंदरलाल पटवा, कैलाश जोशी सहित अन्य सभी आए थे। इंदौर में तब पन्ना लाल एसपी थे। बारात निकल रही तो उन्हें सूचना गई कि सभी वरिष्ठ लोग यहां पर एकत्रित हैं। इस पर उन्होंने तुरंत प्रशासनिक व्यवस्था संभाली और पिताजी से कहा कि कम से कम मुझे तो बताना चाहिए था कि इतने वरिष्ठ जन बारात में आ रहे हैं।

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जापान की तर्ज पर मुंबई में नदी के नीचे बनेगी नदी

हिन्दुस्तान मेल, इंदौर
तारीख 26 जुलाई, साल 2005। मुंबई में तेज बारिश शुरू हुई। धीरे-धीरे सड़कों पर पानी भरने लगा। कुर्ला में मीठी नदी और वेस्ट बांद्रा में बांद्रा तालाब ओवरफ्लो हो गया। इस दिन 24 घंटे में 944 मिलीमीटर से ज्यादा पानी बरसा। ये मुंबई में पूरे जुलाई महीने में होने वाली बारिश के बराबर था।
सिर्फ एक दिन की बारिश से पूरी मुंबई में रास्ते बंद हो गए, फ्लाइट और ट्रेनें रोकनी पड़ीं। लोग जहां थे, वहीं फंसकर रह गए। 1094 लोगों की जान चली गई। 550 करोड़ का नुकसान हुआ। इस बाढ़ ने बता दिया कि मुंबई ऐसे हालात से निबटने के लिए तैयार नहीं है। इसके बाद भी लगभग हर साल बरसात के मौसम में मुंबई डूबती रही और लोगों की जानें जाती रहीं।
ऐसे हालात दोबारा न बनें, इसके लिए महाराष्ट्र सरकार ने प्लानिंग शुरू की है। महाराष्ट्र इंस्टीट्यूट आॅफ ट्रांसफॉर्मेशन, यानि मित्रा जापान की कंपनी द जापान इंटरनेशनल को-आॅपरेशन एजेंसी के साथ मिलकर अंडरग्राउंड रिवर प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं।
प्रोजेक्ट पर इसलिए भी फोकस है, क्योंकि क्लाइमेट चेंज की वजह से मुंबई के कई इलाके डूबने की रिपोर्ट आती रही हैं। 2021 में इंटरगवर्नमेंटल पैनल आॅन क्लाइमेट चेंज, यानि कढउउ ने एक रिपोर्ट जारी की थी।
इस रिपोर्ट के आधार पर नोएडा की फर्म फटरक ने अनुमान लगाया था कि बढ़ते समुद्री जलस्तर की वजह से 2050 तक मुंबई, कोच्चि, मंगलौर, चेन्नई, विशाखापट्टनम और तिरुवनंतपुरम समेत कई शहर डूब सकते हैं। अगर मुंबई में अंडरग्राउंड रिवर प्रोजेक्ट कामयाब रहता है तो इन शहरों को भी फायदा मिलेगा।
मीठी नदी के नीचे बनेगी अंडरग्राउंड टनल- महाराष्ट्र इंस्टिट्यूट आॅफ ट्रांसफॉर्मेशन के उएड प्रवीण परदेसी ने बताया कि हम मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली मीठी नदी के ठीक नीचे नदी जैसी अंडरग्राउंड टनल या रिजरवायर बनाने की तैयारी कर रहे हैं।
प्रवीण परदेसी बताते हैं- जब कभी मौसम ज्यादा गर्म होता है, तो ज्यादा बारिश होती है। एवरेज रेनफॉल उतना ही रहता है। इससे कुछ ही दिनों में पूरे सीजन की बारिश हो जाती है। ज्यादा बारिश होने पर हमारी ड्रेनेज कैपेसिटी कम पड़ जाती है।
प्रवीण बताते हैं- मुंबई का बिल्ट अप एरिया बढ़ गया है। पहले प्लानिंग के वक्त हमने सोचा था कि 100 मिलीमीटर बारिश होगी, तो 50 मिलीमीटर पानी जमीन के अंदर चला जाएगा। नॉर्मली होता है कि 50% पानी बह जाता है, लेकिन ये अभी 100% हो गया है। हमने हर जगह फर्शी या बिल्ट अप एरिया लगा दिया। इससे पानी जमीन के अंदर जाता ही नहीं है। प्रवीण परदेसी कहते हैं- सड़क पर पानी न बहे, इसके लिए सारा पानी स्टॉर्म वाटर ड्रेन में जाना चाहिए। इतने बड़े स्टॉर्म वाटर ड्रेन बनाना मुश्किल होता है। इसी समस्या का हल जापान में खोजा गया है।

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