Hindustanmailnews

इंदौर

जहां-जहां कब्जा… उस पर पड़ा जेसीबी का पंजा

शहर की सड़कों और फुटपाथों को कब्जे व अतिक्रमण से मुक्त करने के लिए नगर निगम की रिमूव्हल कार्रवाई निरंतर जारी है। निगम की टीम द्वारा पुलिस फोर्स की मौजूदगी में रानीपुरा-झण्डा चौक में बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया गया। कार्रवाई के दौरान विवाद व विरोध की स्थिति भी बनी। बावजूद इसके कार्रवाई जारी रही। निगम की टीम ने करीब 10 ट्रक सामान भी जब्त किया है। कार्रवाई के लिए जनप्रतिनिधियों ने भी महापौर व निगमायुक्त से कहा था।
शहर की यातायात व्यवस्था को पटरी पर लाने और जनता व वाहन चालकों को परेशानियों से निजात दिलाने के लिए नगर निगम द्वारा बड़ा अभियान चलाया जा रहा है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव व निगमायुक्त हर्षिकासिंह के निर्देश पर दुकानों के बाहर फुटपाथ तथा सड़क पर अवैध रूप में किए गए अतिक्रमण व कब्जे हटाने की कार्रवाई की जा रही है। कार्रवाई क्रम में निगम के अमले ने गुरुवार को शहर के घने इलाके रानीपुरा-झंडा चौक में बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया।

कार्रवाई के तहत नई बागड़, रानीपुरा चौराहा, रानीपुरा व झण्डा चौक के आसपास से कब्जे व अतिक्रमण हटाए गए। 40 से ज्यादा गुमटी भी हटाई गईं। दुकानदारों ने दुकानों के बाहर फुटपाथ पर कब्जे कर शेड भी बना लिए थे। 20 दुकानों के ओटले व शेड भी तोड़े गए। दुकानदार व रहवासियों ने सालों से अवैध कब्जे जमा रखे थे, जिसके कारण वाहन चालक व लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता था। निगम की टीम द्वारा 10 ट्रक से ज्यादा सामान भी जब्त किया गया। कार्रवाई के दौरान विवाद व विरोध की नौबत भी खड़ी हुई। निगम की सख्ती व पुलिस फोर्स के आगे विरोध टिक नहीं पाया। कार्रवाई के दौरान रिमूव्हल अधिकारी, ब्रजमोहन भगोरिया, अश्विन बबलू कल्याणे सहित अन्य कर्मचारी उपस्थित थे।

जहां-जहां कब्जा… उस पर पड़ा जेसीबी का पंजा Read More »

‘सिर्फ अवधारणा बनाने का टूल बन गया है आज का कॉर्पोरेट मीडिया’

वर्तमान दौर में मीडिया खबरें देने और सत्ता से सवाल पूछने के अपने मूल काम से हटकर सिर्फ अवधारणा बनाने का शक्तिशाली टूल बन गया है। वह सत्ता से असहमति के स्वरों की अपराधी जैसी छवि बनाने के जुटा है। आज संसद विपक्षविहीन, मीडिया खबरविहीन और लोकतंत्र का लोक अर्थात् जनता अधिकारविहीन है। ये बातें वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखिका भाषा सिंह, नई दिल्ली ने स्टेट प्रेस क्लब, मध्यप्रदेश द्वारा ‘चुनाव, जंग और मीडिया’ विषय पर आयोजित संवाद कार्यक्रम में मुख्य वक्ता बतौर कहीं। उन्होंने कहा कि आज का कॉर्पोरेट मीडिया खबरविहीन है, लेकिन चलता चौबीसों घंटे है।
उन्होंने कहा- आज का मीडिया सिर्फ सत्ता, पार्टी, विचारधारा और उनके कारोबारी सहयोगियों के हित में परसेप्शन गढ़ने का काम करता है, इसीलिए देश का ही हिस्सा होने के बाद भी तीन जून से सुलग रहे मणिपुर एक भी मीडिया हॉउस अपना संवाददाता नहीं भेजता, लेकिन इजराइल के युद्ध के कवरेज के लिए अपने पत्रकार भेजे जाते हैं। इस युद्ध में इजराइल के पक्ष में एकतरफा कवरेज कर मीडिया ने वॉर क्राइम किया है। यदि अल-जजीरा के या कुछ अन्य अपनी जान पर खेलकर नहीं, बल्कि जान गंवाकर सच्ची रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार नहीं होते तो दुनिया नहीं जान पाती कि फिलिस्तीन के हजारों बच्चे इस युद्ध में किस दर्दनाक तरीके से मरे गए हैं। इसी तरह मीडिया ने यह झूठा परसेप्शन बनाया था कि आतंकवादी कसाब को जेल में बिरयानी खिलाई जा रही है, जबकि बाद में उसके वकील ने यह बात स्वयं कही कि उसने यह बात मजाक में कह दी थी। कोरोना के समय मीडिया द्वारा यह झूठी अवधारणा बनाई गई थी कि तबलीगी जमात के थूकने से कोरोना फैला। यह बात भी बाद में गलत साबित हुई, तब तक कॉर्पोरेट मीडिया नफरत के सॉफ्टवेयर का अपना काम कर चुका था।
फिर भी सत्ता से सवाल नहीं किए जाते – सिंह ने कहा कि नफरत फैलाकर ध्रुवीकरण करने का राजनीतिक असर भी दिखता है। यह देश में पहली बार हो रहा है कि देश का मीडिया जिम्मेदार लोगों और सत्ता से सवाल पूछने की बजाय विपक्ष को कटघरे में खड़ा करने और उसे कमजोर करने में जुटा है। स्वतंत्रता के बाद कभी भी संसद को विपक्षविहीन नहीं किया गया, लेकिन मीडिया का पूरा विमर्श मिमिक्री पर केंद्रित है और मिमिक्री को अपराध घोषित किया जा रहा है। देश का मान बढ़ाने वाली महिला पहलवान अपने जूते टांग देती हैं, लेकिन कोई मीडिया हॉउस सत्ता से सवाल नहीं करता कि यौन शोषण करने वाले सांसद को क्यों बचाया जा रहा है? सजायाफ्ता बलात्कारी गुरुमत राम रहीम बाहर न सिर्फ खुला घूम रहा है, बल्कि चुनावी सभाएं भी कर रहा है, लेकिन निर्भया के समय ऐतिहासिक काम करने वाला मीडिया इन हिन्दू बेटियों के मामले में चुप है। जन, जंगल, जमीन से, जनता के हितों के मुद्दे मीडिया से गायब हैं। हाल के विधानसभा चुनावों के समय छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को भ्रष्टाचारी साबित करने में तो मीडिया जुटा रहा, लेकिन उसी समय नरेंद्रसिंह तोमर के बेटे के दसियों हजार करोड़ रुपए की बात करने, नशे की खेती और गैरकानूनी मनी ट्रांसफर इत्यादि से जुड़ी वीडियो रिकॉर्डिंग पर मीडिया में सन्नाटा रहा। उन्होंने कहा कि आज देश को असली पत्रकारिता करने वालों की और असली पत्रकारों को देश के साथ की जरूरत है।

‘सिर्फ अवधारणा बनाने का टूल बन गया है आज का कॉर्पोरेट मीडिया’ Read More »

इंदौर-भोपाल के बीच 23 किमी की दूरी घटाने 3 हजार करोड़ का प्रोजेक्ट।

राजधानी भोपाल में पश्चिम बायपास का काम जल्द ही शुरू होने वाला है।मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के इस प्रोजेक्ट से भोपाल और इंदौर के बीच की दूरी को 28 किमी तक कम किया जाएगा साथ ही नर्मदापुरम और जबलपुर की ओर से आने वाले भारी वाहन बिना शहर में प्रवेश करे सीधे इंदौर पहुंच सकेंगे। मंडीदीप से इंदौर के बीच बनने वाले इस पश्चिमी बायपास के लिए जमीन अधिग्रहण का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है और मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के इस प्रोजेक्ट से मंडीदीप और इंदौर के बीच की दूरी को 28 किमी तक कम किया जाएगा।

नए प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू
3 हजार करोड़ की लागत से बनने वाले पश्चिमी बायपास के लिए एमपीआरडीसी ने विशेषतौर पर महाप्रबंधक एचएस रिजवी को जिम्मेदारी सौंपी है। इस प्रोजेक्ट के तहत होने वाली जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू की जा चुकी है। 3 हजार करोड़ की लागत से बनने वाले इस प्रोजेक्ट में 427 करोड़ की राशि जमीन अधिग्रहण के लिए रखी गई है। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जमीन को साफ कर निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा ताकि काम तेजी से पूर्ण हो। प्रदेश की औद्योगिक राजधानी इंदौर और मंडीदीप के सीधे जुड़ने से औद्योगिक क्षेत्र को लाभ होगा।

नए प्रोजेक्ट के साथ साथ मौजूदा बायपास का मेंटेनेंस भी शुरू
अभी शहर के किनारे 52 किमी का बायपास मौजूद है। अब नए प्रोजेक्ट की शुरूआत के साथ साथ इस मौजूदा बायपास के मेंटेनेंस का काम भी शुरू कर दिया गया है। मौजूदा बायपास तीन एंट्री पॉइंट्स से शहर को जोड़ता है और अब नया बनने वाला 41 किमी का हिस्सा 11 मिल से मंडीदीप के पहले औबेदुल्लागंज से सीधे भौंरी के पास इंदौर रोड़ से जुड़ जाएगा। इस चार लेन रोड के किनारे सर्विस रोड का निर्माण भी किया जाएगा जिससे आवागमन सुचारू रूप से चलता रहे।

इंदौर-भोपाल के बीच 23 किमी की दूरी घटाने 3 हजार करोड़ का प्रोजेक्ट। Read More »

ट्रॉयल रन ट्रेन की चपेट में 2 छात्राओं की मौत

इंदौर-देवास रेलवे लाइन पर रेल सुरक्षा आयुक्त (सीएसआर) के दौरे के बाद ट्रैक पर हादसा हो गया। सीआरएस स्पेशल ट्रेन से दो स्टूडेंट्स की मौत हो गई। जिस ट्रैक पर घटना हुई है, वहां पर ट्रेन का पहली बार ट्रॉयल रन था। इसी ट्रैक से तीन स्टूडेंट्स बबली, राधिका और साधना सेटेलाइट जंक्शन कॉलोनी स्थित अचीवर कोचिंग क्लास से अपने घर वापस लौट रही थी।
घटना की जानकारी लगते ही मौके पर रेलवे के अधिकारी और लसूड़िया थाने के पुलिस अधिकारी पहुंचे। घटना की जानकारी कैबिनेट मंत्री तुलसीराम सिलावट ने भी केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को दी। इसके बाद केंद्रीय रेल मंत्री ने डीआरएम को जांच के आदेश दिए। इधर, हादसे की जांच के आदेश दिए जा चुके हैं। जिस ट्रैक पर हादसा हुआ, उसकी स्पीड टेस्ट की ओके रिपोर्ट भी आ गई है। ट्रैक पर ट्रैफिक शुरू हो चुका है। रिपोर्ट आने के बाद गुरुवार रात 11 बजे इसी ट्रैक से पहली ट्रेन शांति एक्सप्रेस गुजरी। इसके बाद शुक्रवार से ट्रेनों के आने जाने का सिलसिला जारी है। लसूड़िया थाना प्रभारी तारेश सोनी के मुताबिक दोहरीकरण योजना में बरलई से लक्ष्मीबाई नगर रेलवे स्टेशन तक नया रेलवे ट्रैक बनाया गया है। इस ट्रैक का काम 14 दिसंबर को पूरा हुआ। इसके बाद ट्रेनों का ब्लॉक ले लिया गया था। ट्रेन बंद होने के कारण इस ट्रैक पर ग्रामीण लोग आने लगे थे। गुरुवार को ट्रॉयल रन की जानकारी कई ग्रामीणों को नहीं थी। पुलिस के मुताबिक जहां हादसा हुआ, वहां से घर दो सौ मीटर की दूरी पर है। मृतका राधिका और बबली के पिता मजदूरी करते हैं। राधिका का एक छोटा भाई 14 साल का है, जबकि बबली तीन बहन व एक भाई है। दोनों घर से आधा किलोमीटर दूर कोचिंग रोज पैदल आती-जाती थीं। तीनों सहेलियां बबली, राधिका और साधना ट्रैक क्रॉस कर रही थीं कि अचानक ट्रेन आ गई। इसकी स्पीड 120 किमी प्रतिघंटा थी। बच्चियों को लगा कि ट्रेन पुराने ट्रैक से निकलेगी, क्योंकि नए ट्रैक पर तो ट्रेन की आवाजाही बंद है और वे नए ट्रैक पर रुक गईं। राधिका आगे निकल चुकी थी। ट्रेन ने दोनों को चपेट में ले लिया।

ट्रॉयल रन ट्रेन की चपेट में 2 छात्राओं की मौत Read More »

हर इंदौरी के दिल में है राजवाड़े का सम्मान…विदेशी पर्यटक भी समेटते हैं यादें

इंदौर शहर की आन-बान-शान कहे जाने वाला ऐतिहासिक राजवाड़ा (जिसे देवी अहिल्याबाई होलकर के समय में महलवाड़ा भी कहा जाता था) शहर की सांस्कृतिक, राजनीतिक,सामाजिक एवं व्यावसायिक विरासत का केंद्र रहा है। गौरतलब है कि 80 के दशक में इंदौर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने राजवाड़े के मुख्य द्वार से लगी दीवार के नीचे अंडरग्राउंड पब्लिक टॉयलेट्स बनवाए थे, जिसका उपयोग कुछ सालों तक चलता रहा और इसी कारण लंबे अरसे तक नमी रहने से बांकेबिहारी मंदिर के नजदीक के ऐतिहासिक राजवाड़े का हिस्सा झुक गया था। 80 के दशक के ऐतिहासिक राजवाड़े के चित्र में जहां बांके बिहारी मंदिर के नजदीक अंडरग्राउंड पब्लिक टॉयलेट दिखाई पड़ती है, वहीं इसके सीधे हाथ की तरफ ट्रैफिक चिह्नों का एक विशाल बोर्ड भी दिखाई देता है।
आईएमसी इंदौर, इंदौर स्मार्ट सिटी, इंदौर प्रशासन तथा शहर के वरिष्ठ राजनेताओं एवं बुद्धिजीवियों से निवेदन है कि बांकेबिहारी मंदिर के नजदीक राजवाड़े के सामने लगे डिजिटल बोर्ड को कहीं और शिफ्ट किया जाना चाहिए, जो कि ऐतिहासिक होलकरकालीन राजवाड़े की सुंदरता में बाधा डालता है। इंदौर शहर के नागरिक रोज सुबह देवी अहिल्याबाई होलकर की लगी प्रतिमा के दर्शन करने के बाद अपने दिन की शुरुआत करते हैं।
देवी अहिल्याबाई होलकर में श्रद्धा एवं आस्था तथा ऐतिहासिक राजवाड़े का सम्मान हर इंदौरी के दिल में है। राजवाड़े पर स्थित होलकर वंश के कुल देवता श्री मल्हारी मार्तंड मंदिर की सामने वाली पट्टी पर ऐतिहासिक राजवाड़े चौक पर स्थित शराब की दुकान को भी कहीं और शिफ्ट किया जाना बेहद जरूरी है। हाल ही में राजवाड़े को देखने आने वाले पर्यटकों की संख्या अत्यधिक वृद्धि हुई है, वहीं बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी इसे निहारने आते हैं, अत: हर इंदौरी का मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से निवेदन है कि इस ओर वे ध्यान दें। आज तक हम तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व. सुंदरलाल पटवा को इसलिए याद करते हैं और धन्यवाद देते हैं कि उन्होंने इंदौर शहर की ऐतिहासिक कृष्णपुरा छतरियों पर से अत्यधिक गंदगी एवं गुमटियों को हटवाकर सौंदर्यीकरण एवं विद्युत साज-सज्जा कर इंदौर की जनता को समर्पित किया था। पिछले कई वर्षों से लगातार हम शहर के इस ऐतिहासिक हिस्से पर हेरिटेज वॉक कर रहे हैं और इन हेरिटेज वॉक में सम्मिलित होने वाले शहर के जागरूक नागरिकों ने भी इस ओर ध्यान नहीं देने पर निराशा जताई थी।

हर इंदौरी के दिल में है राजवाड़े का सम्मान…विदेशी पर्यटक भी समेटते हैं यादें Read More »

Scroll to Top
Verified by MonsterInsights