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इंदौर

केंंद्र में जब कांग्रेस सरकार थी, तब किसानों को मिलते थे 10 आरी तक के अफीम पट्टे

मंदसौर-नीमच संसदीय क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी व सांसद सुधीर गुप्ता के बयान पर जिला पंचायत सदस्य व कांग्रेस नेता ने तरूण बाहेती पलटवार किया है। बाहेती ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नीमच की सुविधा और सौगाते छीनने वाले और विपक्ष पर अनर्गल बयानबाजी करने से पहले अपने कार्यकाल का हिसाब दे । केंद्र में जब कांग्रेस की सरकार थी,तब किसानों को 10 आरी तक के अफीम पट्टे मिलते थे। भाजपा सरकार ने सीपीएस पद्धति से अफीम खेती का फामूर्ला लागूकर अफीम पट्टों का क्षेत्रफल मात्र 5 आरी कर दिया। इधर किसानों के फर्जी एनडीपीएस एक्ट के केस बनाने के मामले लगातार उठ रहे हैं और आप चुप्पी साधे हुए हो।
गौरतलब है कि भाजपा प्रत्याशी व सांसद सुधीर गुप्ता ने मीडियाकर्मियों को दिए बयान में कहा, कि क्या दिलीपसिंह गुर्जर घर से अफीम के पट्टे देंगे या फिर दिग्विजयसिंह की अटैची से निकलेंगे। सांसद गुप्ता के इस बयान को उनकी बौखलाहट बताते हुए कांग्रेस नेता व जिला पंचायत सदस्य तरूण बाहेती ने कहा कि भाजपा प्रत्याशी सुधीर गुप्ता अपने पद की मयार्दा तक भूल गए हैं ।
जिस पर बाहेती ने उनके बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि सुधीर गुप्ता जिस झूठे विकास के नाम पर वह चुनाव लड़ रहे हैं क्या यह विकास भी उन्होंने अपने घर से किया था ? सुधीर गुप्ता बताए कि जिन अफीम पट्टो को देने का वह वादा कर रहे है वे उन्हें किसकी अटेची से निकाला है। बाहेती ने कहा कि कोई भी जनप्रतिनिधि जनता के वोट की ताकत से ही बनता हैं और सरकार जनता के पैसों से ही कोई विकास कार्य या सुविधाए देती है। सुधीर गुप्ता को भी जनता ने दो बार सांसद बनाया लेकिन उनका अहंकार इतना ज्यादा हो गया है कि वे हल्के स्तर की बयानबाजी पर उतर आए है। बाहेती ने कहा कि पर प्रचार के दौरान जनता उनसे सवाल पूछ रही है कि अपने 10 वर्षीय कार्यकाल में आपने क्या किया तो वह खुद की कोई उपलब्धि नहीं बता विपक्षी उम्मीदवार की आलोचना करने में लगे हैं। बाहेती ने कहा कि भाजपा उम्मीदवार पहले इस बात का जवाब दे कि उन्होंने नीमच जिले को क्या दिया, सुधीर गुप्ता का नीमच के प्रति हमेशा भेदभाव व्यवहार रहा है। सांसद बनने के बाद बीते 10 सालों में सुधीर गुप्ता ने नीमच को सुविधा या सौगाते दिलाने के बजाए छीनने का काम किया है। बाहेती ने कहा टैंकर बांटना एवं प्रतीक्षालय बनाना ही सिर्फ विकास ही नहीं कहा जा सकता।
बाहेती ने कहा कि सांसद ने तो नीमच में मेडिकल कॉलेज की सौगात के नाम पर कह दिया था कि नीमच लेट हो चुका है, ये नीमच के पत्रकारों और जनता की आवाज का कमाल था कि तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने नीमच के मेडिकल कॉलेज की मांग को प्रस्ताव बनाकर दिल्ली भेजा, जिसके बाद नीमच को मेडिकल कॉलेज की सौगात मिली। कांग्रेस नेता ने कहा कि सांसद सुधीर गुप्ता नीमच में कोरोना काल में बंद हुई ट्रेनों को वापस आरंभ नहीं करा पाए। कहा कि सांसद सुधीर गुप्ता ने नीमच को कुछ दिया नहीं, सिर्फ छीनने का काम किया। 10 साल के संसदीय कार्यकाल में सुधीर गुप्ता नीमच को ऐसा कोई बड़ा उद्योग नहीं स्थापित कराया, जिससे नीमच जिले की जनता को रोजगार के अवसर उपलब्ध हो।

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क्या तेरे मन में समाई… काहे को दुनिया बनाई…

नारदजी ने ब्रह्माजी से कहा कि पिताजी आप मुझे शिवपुराण की जो कथा सुना रहे हैं उसमें मेरा मन लग गया है। मेरा एक सवाल है कि आखिर यह संसार कैसे बना? आप पहले आए या महादेव? आखिर संसार की शुरूआत हुई कहां से? वास्तव में देखा जाए तो यह प्रश्न तब भी था, आज भी है। इस संसार को बनाने की जरूरत क्या थी परमात्मा को। एक गीत के बोल भी हैं ‘क्या तेरे मन में समाई… काहे को दुनिया बनाई…।’ तो संसार क्या है। पहले गांव में पहली बरसात में बच्चे छोटे-छोटे घर बनाते थे। शाम तक खेलते थे। जाते-जाते घर तोड़ जाते थे। परमात्मा के लिए संसार खिलौना है। जब उनकी इच्छा होती है तब बनाते हैं। जब चाहते हैं मिटाते हैं। यह अनुभव करने का विषय है। जहां भजन-पूजन का साधन होना चाहिए उन स्थानों को लोग पिकनिक स्पॉट बनाकर बैठ गए। इसीलिए प्रकृति फिर कैदारनाथ की तरह प्रलय दिखाती है। कई भागे। हजारों काल का ग्रास बन गए। भगवान के लिए यह सब करना बड़ी बात नहीं है। खेल जैसा है। भगवान है, इसका सबूत है केदारनाथ मंदिर के पीछे आकर टिकी शिला। जिसकी वजह से भयावह बाढ़ में भी केदारमंदिर को कुछ नहीं हुआ। ये शिव तत्व है। जो ब्रह्माड में व्याप्त है।

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नहीं खुल सका मुस्कान का मोबाइल लॉक… उलझती जा रही गुत्थी

इंदौर। मुस्कान अग्रवाल की मौत की गुत्थी उलझती जा रही है। पुलिस जिस बीमारी का जिक्र कर रही है। उसे परिवार के लोग नॉर्मल बता रहे हैं। रूम मैट ने पुलिस को जो बयान दिए हैं, उसमें बताया है कि मुस्कान को काफी असहनीय दर्द रहता था। यह भी बताया है कि मुस्कान इसके कारण कई बार पढ़ाई नहीं कर पाती थी। क्लास छोड़ना पड़ती थी। लेकिन पुलिस को शंका है कि उसकी दोस्त कुछ छिपा रही है। इधर, परिवार ने कहा है कि बेटी पढ़ने में होशियार थी। परिवार की तरफ से उसे किसी बात का तनाव नहीं था। अब पुलिस ही इस मिस्ट्री को सुलझाए। पुलिस की टीम मुस्कान के मोबाइल का लॉक अभी भी नहीं खोल पाई है। वहीं लैपटॉप से भी कुछ खास हाथ नहीं लगा है। लसूड़िया पुलिस ने बरूआ फाटा स्थित मुस्कान अग्रवाल के घर जाकर पिता, मां और भाई के बयान लिए हैं। वहीं रविवार को मुस्कान के परिवार ने उज्जैन में उसकी अंतिम क्रिया भी पूरी कर दी। पिता ने अपने और बेटी के बारे में कुछ भी जानकारी देने से मना कर दिया। कहा अभी हम सदमे में हैं। इस मामले में हम पुलिस से सही जांच की मांग कर रहे हैं।
असहनीय दर्द था…वह डिप्रेशन में थी -मुस्कान की रूम मेट ने पुलिस को जो जानकारी दी उसमें बताया कि वह जिस बीमारी से घिरी हुई थी। उसमें उसे असहनीय दर्द होता था। कई बार सो नहीं पाती थी। कई बार पेन किलर लेती थी। उसने कई बार इसके लिये क्लास भी मिस की। इसके कारण वह डिप्रेशन में जा रही थी। पुलिस को रूम मेट के बयानों को लेकर संदेह है। क्योंकि सुसाइड के पहले के फुटेज में मुस्कान नॉर्मल दिखी है। उसके अचानक रूम से जाने के बाद उसकी रूम मेट जिस तरह से व्यवहार कर रही थी वह संदेह जताता है।

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चार साल बाद भी काम अधूरा और लगेंगे दो साल!

शहर में 4 साल से तीन बस स्टैंड के निर्माण चल रहे हैं। नादरा बस स्टैंड पर दुकानें बन रही हैैं। आरिफ नगर में बैरसिया रोड की तरफ जाने वाली बसों के लिए बस स्टैंड बन रहा है और विद्या नगर पर भी एक छोटा आईएसबीटी बन रहा है, ताकि होशंगाबाद रोड की तरफ आने वाली बसों को वहां रोका जा सके, लेकिन तीनों जगहों पर काम की गति इतनी धीमी है कि अगले दो साल और प्रोजेक्ट पूरे होते नजर नहीं आ रहे। नतीजा यह है कि शहर में बस से रोजाना यात्रा करने वाले 20 हजार लोग तो परेशान होते ही हैं… हमीदिया रोड और बैरसिया रोड पर रोजाना जाम भी लग रहा है।
नादरा बस स्टैंड
नादरा पर बस स्टैंड की दुकानों का काम चल रहा है। यहां 4 करोड़ 84 लाख रुपए से पुरानी दुकानों को तोड़कर नई 139 दुकानें बनाई जा रही हैं। नादरा पर खड़ी होने वाली बसों को आरिफ नगर शिफ्ट किया जाएगा। इसके बाद यहां लो फ्लोर बसों की पार्किंग का इंतजाम भी किया जाएगा। जब तक आरिफ नगर बस स्टैंड का काम पूरा नहीं हो जाता है, तब तक बसें नादरा पर ही खड़ी होंगी। यहीं से सिर्फ विदिशा के लिए परमिट के हिसाब से अधिकृत 35 बसें चलना चाहिए। असलियत यह है कि रात में इंदौर की कई बसें भी यहीं से चलती है। इसके अलावा पुतली घर से चलने वाली कई रूट की बसें भी यहीं से चलाई जा रही हैं। नादरा बस स्टैंड पर अभी 160 बसें आती हैं और यहां से साढ़े छह हजार से अधिक यात्री रोज यात्रा करते हैं।
आरिफ नगर बस स्टैंड
आरिफ नगर बस स्टैंड पर फेस-1 में बसों के खड़े होने के लिए प्लेटफॉर्म बनाया जा चुका है। फिलहाल फेस-2 का काम जारी है। फेस-2 का काम 10 करोड़ रुपए से पूरा होना है। यहां यात्रियों को 150 बसों की सुविधा मिलेगी, साथ ही एक समय पर 150 यात्रियों के लिए वेटिंग हॉल की सुविधा रहेगी। स्टैंड में दुकानें और 4 सुलभ शौचालय बनाने का काम पूरा हो गया है। अभी यात्री प्रतीक्षालय, टिकट काउंटर और पुलिस कंट्रोल रूम के लिए टर्मिनस बिल्डिंग तैयार की जा रही है। बिल्डिंग को तीन भागों में बनाया जा रहा है। इनमें से एक हिस्से का काम हो चुका है। दूसरे पर छत डाली गई है। तीसरे पर अभी छत डालने का काम बाकी है। काम को पूरा करने की डेडलाइन 31 अप्रैल तय की गई है। तीसरे फेस में यहां पर छूट गई खाली जगहों पर लगभग 4 करोड़ से रोड का निर्माण किया जाएगा। साथ ही सभी सड़क को मेन रोड से जोड़ा जाएगा। बस स्टैंड का पूरा होने के बाद नादरा की बसें भी यहीं शिफ्ट होंगी।
विद्यानगर
यहां दो फ्लोर की बेसमेंट पार्किंग केलिए दो बिल्डिंग बनाई जा रही हैं, साथ ही इनमें दो फ्लोर ऊपर दुकानों के लिए बनाए जाने हैं, जिसका एक बिल्डिंग का काम पूरा हो चुका है, वहीं दूसरी बिल्डिंग में अभी तक सिर्फ बेसमेंट पार्किंग तक का ही काम पूरा हो पाया है। इसके अलावा यात्रियों की सुविधा के लिए टिकट काउंटर, प्रतीक्षालय और पुलिस सुविधा केंद्र के लिए बिल्डिंग तैयार हो चुकी है। इसमें बस अंदर की फिनिशिंग का काम बचा हुआ है।
समय सीमा तय करना चाहिए
बढ़ते हुए शहर के लिए अलग-अलग इलाकों में नए बस स्टैंड की प्लानिंग तो अच्छी है, लेकिन प्रोजेक्ट प्लानिंग में समय सीमा भी तय होना चाहिए। लंबे समय तक काम पूरा नहीं होने से कई बार जरूरतें ही बदल जाती हैं। भोपाल में यह प्रोजेक्ट धीमा चलने की एक बड़ी वजह जमीन से संबंधित विवाद और एजेंसियों के पास फंड की कमी होना भी है।

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इंद्रदेव ने स्थापित की थी प्रतिमा…

इंदौर से लगभग 40 किमी दूर महू मंडलेश्वर मार्ग पर अष्टभुजाधारी माता पार्वती का अति प्राचीन मंदिर स्थित है। देवी का यह मंदिर मालवा एवं निमाड़ की सीमा के बीच खूबसूरत वादियों में है। प्राचीन इतिहास से जुड़ा यह मंदिर अपने साथ कई रोचक तथ्यों को भी संजोए हुए है, लिहाजा दूर दराज से प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु मंदिर में माता के दर्शन करने आते है। क्षेत्र होलकर राज्य की अंतिम सीमा माना जाता था। यहां बनाया गया जाम गेट इन सीमाओं को जोड़ता हैं और मालवा एवं निमाड़ का बॉर्डर बना हुआ है।
जंगलों के बीच से निकलने वाली पतली और टेढ़ी सड़कों से सैर करते हुए निकलना और भी खूबसूरती भरा होता है। इन्ही चेक प्वाइंट के ऊपर पहाड़ी पर माता पार्वती का मंदिर है जो लगभग 3000 फिट की उंचाई पर बना है। मंदिर में नवरात्रि के अवसर पर विभिन्न धार्मिक आयोजन-अनुष्ठान हो रहे हैं। मंदिर के ऊपर से पहाड़ियां, घाटी बेहद खूबसूरत और रोमांचक नजर आते है। स्कंद पुराण में भी इस मंदिर का वर्णन मिलता है, स्कंद पुराण के अनुसार माता के इस प्रतिमा की स्थापना देवराज इंद्र ने की थी। स्थापित प्रतिमा में माता महिषासुर का वध करती नजर आ रही है। इसीलिए माता को महिषासुर मर्दनी भी कहा जाता है। यह प्रतिमा पत्थर से निर्मित है। करीब सवा फिट की है। मान्यता है कि माता दिन में तीन बार अपना रूप भी बदलती है।

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